51cAzKv7bJL
Price: ₹ 149.00
(as of May 31,2021 17:08:37 UTC – Details)

jPjiA4C

थापा लड़की की कुर्सी के पीछे गावदी की भांति खड़ा था। उसकी ठोढ़ी पर बैंड-एड चिपकी थी। उसके हाथ ऊपर उठे और लड़की के वक्षों पर कस गए।
थापा बोला, "अपनी टाँगें खोलो ना!"
लड़की सिसकते हुए फुसफुसा कर धीरे से बोली, "ऊँम्म… कुछ हो गया तो..!"

थापा फिर उसकी गर्दन पे अपने होंठ रगड़ते हुए बोला, "मैं भला अपनी जान को कुछ होने दुँगा… प्लीज़ एक बार कर लेने दो ना… तुम्हें मेरी कसम..!"
लड़की थापा की प्यार भरी चिकनी चुपड़ी बातें सुन कर एक दम से पिघल गयी। उसने लरजते हुए टाँगों में फंसी अपनी कैप्री को अपने पैरों मे गिरा दिया और फिर उसमें से एक पैर निकाल कर खड़े-खड़े अपनी टाँगें फैला दी।

नमस्कार पाठको,

"में आपकी प्रियांशी जैन ! मेंरी सभी कहानियो को इतना प्यार देने के लिए आपका शुक्रिया.मेरी उम्मीद से ज्यादा आप लोगो ने मेरी कहानियो को सराहा और प्यार दिया ! इसी प्यार से प्रेरित होकर में आपके सामने अपनी और एक कहानी लेकर आयी हूं.मुझे उम्मीद है प्यार, रोमांस,सस्पेंस, क्राइम और थ्रिल से भरपुर यह कहानी आपको जरूर पसंद आएगी और इस कहानी को भी आपका ढेर सारा प्यार मिलेगा."
आपकी
प्रियांशी जैन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *