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Price: ₹ 148.00
(as of May 10,2021 09:00:35 UTC – Details)

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‘‘कुबड़ी-कुबड़ी का हेराना?’’ ‘‘सुई हेरानी।’’ ‘‘सुई लैके का करबे?’’ ‘‘कंथा सीबै!’’ ‘‘कंथा सीके का करबे?’’ ‘‘लकड़ी लाबै!’’ ‘‘लकड़ी लाय के का करबे?’’ ‘‘भात पकइबे!’’ ‘‘भात पकाय के का करबे?’’ ‘‘भात खाबै!’’ ‘‘भात के बदले लात खाबे।’’ और इससे पहले कि कुबड़ी बनी हुई मटकी कुछ कह सके, वे उसे जोर से लात मारते और मटकी मुँह के बल गिर पड़ती। उसकी कुहनियाँ और घुटने छिल जाते, आँख में आँसू आ जाते और ओठ दबाकर वह रुलाई रोकती। बच्चे खुशी से चिल्लाते, ‘‘मार डाला कुबड़ी को! मार डाला कुबड़ी को!’’ —इसी पुस्तक से साहित्य एवं पत्रकारिता को नए प्रतिमान देनेवाले प्रसिद्ध साहित्यकार एवं संपादक श्री धर्मवीर भारती के लेखन ने सामान्य जन के हृदय को स्पर्श किया। उनकी कहानियाँ मर्मस्पर्शी, संवेदनशील तथा पठनीयता से भरपूर हैं। प्रस्तुत है उनकी ऐसी कहानियाँ, जिन्होंने पाठकों में अपार लोकप्रियता अर्जित की।



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Dharamveer Bharti Ki Lokpriya Kahaniyan by Dharamveer Bharti

Dharamveer Bharti Ki Lokpriya Kahaniyan by Dharamveer BhartiDharamveer Bharti Ki Lokpriya Kahaniyan by Dharamveer Bharti

उसकी कुहनियाँ और घुटने छिल जाते, आँख में आँसू आ जाते और ओठ दबाकर वह रुलाई रोकती।

‘‘कुबड़ी-कुबड़ी का हेराना?’’‘‘सुई हेरानी।’’‘‘सुई लैके का करबे?’’‘‘कंथा सीबै!’’‘‘कंथा सीके का करबे?’’‘‘लकड़ी लाबै!’’‘‘लकड़ी लाय के का करबे?’’‘‘भात पकइबे!’’‘‘भात पकाय के का करबे?’’‘‘भात खाबै!’’‘‘भात के बदले लात खाबे।’’

और इससे पहले कि कुबड़ी बनी हुई मटकी कुछ कह सके, वे उसे जोर से लात मारते और मटकी मुँह के बल गिर पड़ती। उसकी कुहनियाँ और घुटने छिल जाते, आँख में आँसू आ जाते और ओठ दबाकर वह रुलाई रोकती।

बच्चे खुशी से चिल्लाते, ‘‘मार डाला कुबड़ी को! मार डाला कुबड़ी को!’’

—इसी पुस्तक से

साहित्य एवं पत्रकारिता को नए प्रतिमान देनेवाले प्रसिद्ध साहित्यकार एवं संपादक श्री धर्मवीर भारती के लेखन ने सामान्य जन के हृदय को स्पर्श किया।उनकी कहानियाँ मर्मस्पर्शी, संवेदनशील तथा पठनीयता से भरपूर हैं। प्रस्तुत है उनकी ऐसी कहानियाँ, जिन्होंने पाठकों में अपार लोकप्रियता अर्जित की।

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अनुक्रम

भूमिकागुलकी बन्नोबंद गली का आखिरी मकानआश्रमयह मेरे लिए नहींमुरदों का गाँवस्वर्ग और पृथ्वीचाँद और टूटे हुए लोगकुलटाहरिनाकुस और उसका बेटाएक बच्ची की कीमतधुआँकफन-चोरनारी और निर्वाणमंजिल

धर्मवीर भारतीधर्मवीर भारती

धर्मवीर भारती का जन्म 25 दिसंबर 1926 को इलाहाबाद के अतर सुइया मुहल्ले में हुआ।

वह एक बार प्रसिद्ध साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग के प्रधान संपादक भी थे।डॉ. धर्मवीर भारती को 1962 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उनके उपन्यास गॉड ऑफ क्राइम को एक सदाबहार रचना माना जाता है।सूरज के सातवें घोड़े को कहानी कहने का एक अनूठा उपयोग माना जाता है, जिस पर श्याम बेनेगल ने इसी नाम की एक फिल्म बनाई थी, अंध युग उनका प्रसिद्ध नाटक है।इसका मंचन भारतीय रंगमंच के निर्देशक जैसे अब्राहम अलकाजी, राम गोपाल बजाज, अरविंद गौड़, रतन थियम, एमके रैना, मोहन महर्षि और कई अन्य ने किया है।

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